पाकिस्‍तान या बांग्‍लादेश, आखिर कहां ज्‍यादा सुरक्षित हैं हिंदू, जानें- क्‍या है एक्‍सपर्ट व्‍यू

Khoji NCR
2021-10-19 08:56:03

नई दिल्‍ली/। बांग्‍लादेश में दुर्गा पूजा पंडाल की आंच नई दिल्‍ली तक पहुंची है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्‍लादेश सरकार के एक्‍शन पर संतोष जताया है। बांग्‍लादेश में सांप्रदायिक सौहार्द

ो बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश की जनता के समक्ष आजादी के दौरान हिंदू-मुस्लिम एकता को याद दिलाया है। आइए जानते हैं कि शेख हसीना को क्‍यों याद आई मुक्ति संग्राम की बात। बांग्‍लादेश में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं की क्‍या है तादाद। क्‍या इस घटना से दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा असर। 1- प्रो. हर्ष वी पंत ने कहा कि बांग्‍लादेश में हिंदू अल्‍पसंख्‍यकों की वह स्थिति नहीं है, जो पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान में है। बांग्‍लादेश में हिंदू अल्‍पसंख्‍यकों के हितों का ख्‍याल वहां की सरकार रखती है। उन्‍होंने कहा कि इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री शेख हसीना का यह बयान है। प्रो. पंत ने कहा कि पाकिस्‍तान में हिंदू अल्‍पसंख्‍यकों की स्थिति इसके उलट है। पाकिस्‍तान में कट्टरपंथी सरकार के सामानांतर सत्‍ता चलाते हैं। उनका पाक हुकूमत पर काफी दबदबा है। इसलिए सरकार हिंदू अल्‍पसंख्‍यकों के हितों पर खुलकर नहीं बोल पाती। पाकिस्‍तान में हिंदुओं के हालात किसी से नहीं छिपे हैं। 2- प्रो. पंत ने कहा कि पाकिस्‍तान में आए दिन अल्‍पसंख्‍यकों पर अत्‍याचार होते रहते हैं। पाकिस्‍तान में कट्टरपंथी आए दिन हिंदू पूजा स्‍थलों पर हमला करते हैं। यह सब सरकार की सह पर होता है या सरकार इन सारे मामलों में असहाय होती है। वह कट्टपंथियों के खिलाफ कोई एक्‍शन लेने की स्थिति में नहीं होती है। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों के हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां अल्‍पसंख्‍यकों की आबादी घट गई है। आए दिन जबरन धर्मांतरण की खबरे आती हैं। हालांकि, उन्‍होंने स्‍वीकार किया पिछले कुछ वर्षों में बांग्‍लादेश में भी कट्टरपंथ हावी हुआ है, लेकिन हालात बद्तर नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत-बांग्‍लादेश के रिश्‍तों में इसका काई असर नहीं होगा। भारत सरकार इस बात से पूरी तरह से संतुष्‍ट हैं कि ह‍सीना सरकार ने हिंदु अल्‍पसंख्‍यकों की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द के पर्याप्‍त कदम उठाए हैं। 3- प्रधानमंत्री हसीना ने कहा 1971 के मुक्ति संग्राम में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध किया था। उन्‍होंने कहा कि बंगबंधु शेख मुजीब उर रहमान ने बांग्लादेश को एक धर्मनिपेक्ष राष्‍ट्र बनाया था। उन्होंने कहा कि बंगबंधु भी यही चाहते थे कि बांग्लादेश में सभी संप्रदाय के लोग अपने धर्म का आजादी से पालन करें। हसीना ने कहा हमारा लक्ष्य बांग्लादेश को शांत बनाना है। इस देश में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्‍होंने कहा कि बांग्‍लादेश जिस मकसद से बना था हम उसी रास्ते पर चलेंगे। हम चाहते हैं कि बांग्लादेश गरीबी और बेरोजगारी से मुक्त हो। नागरिकता संशोधन कानून पर उभरे मतभेद गौरतलब है कि वर्ष 1971 में बांग्लादेश को आजादी मिली थी। इसमें भारतीय सेना की अहम भूमिका थी। उस समय बांग्लादेश में पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना के जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण किया था। उसके बाद ही बांग्लादेश अस्तित्व में आया था। तब से भारत और बांग्‍लादेश के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। हालांकि, वर्ष 2019 में बांग्लादेश और भारत के बीच संबंधों में तल्‍खी तब देखने को मिली जब केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून पारित किया था। हसीना ने कई महीनों तक वहां मौजूद भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात करने से इन्‍कार कर दिया था। बांग्लादेश की 14.9 करोड़ की आबादी में करीब 8.5 फीसद हिंदू वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक बांग्लादेश की 14.9 करोड़ की आबादी में करीब 8.5 फीसद हिंदू हैं। कोमिला जिला समेत बांग्‍लादेश के कई और जिलों में हिंदू समुदाय के लोगों की बड़ी आबादी है। कोमिला के जिस इलाके में यह घटना हुई, वहां दशकों से हिंदू और मुसलमान आपसी सद्भाव के साथ रहते आए हैं। मुस्लिम तबके के लोग भी दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में जाते हैं। इसी वजह से यहां रात को पूजा पंडालों में कोई पहरा नहीं होता है। नौ वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर लगभग 3,721 हमले गौरतलब है कि पिछले नौ वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर लगभग 3,721 हमले हुए है। 2021 पिछले पांच वर्षों में अब तक का सबसे घातक वर्ष रहा है। ढाका ट्रिब्यून ने आनलाइन प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इसी अवधि में हिंदू मंदिरों, मूर्तियों और पूजा स्थलों पर तोड़फोड़ और आगजनी के कम से कम 1,678 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में 18 हिंदू परिवारों पर हमले हुए हैं। पिछले नौ वर्षों में सबसे खराब स्थिति 2014 में थी जब अल्पसंख्यकों के 1,201 घरों और प्रतिष्ठानों में उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की थी।

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