फतेहाबाद : सड़क हादसों का मुख्य कारण वाहनो की दशा सही नहीं होना होता है। कई वाहनों के कागजात तक नहीं होते और हादसा के बाद फरार हो जाते है। ऐसे में पुलिस भी आरोपितों को नहीं पकड़ पाती है। अगर जिला प
रशासन इन खामियों को दूर कर लेता है तो इन हादसों को रोका जा सकता है। हर जिले में फोरलेन बन गया है। ऐसे में वाहनों की रफ्तार भी इतनी अधिक होती है कि हादसा कब हो जाए किसी को पता नहीं होता। वहीं जिस वाहन से वो टकराते हैं उनकी फिटनेस भी ऐसी होती है कि उसमें सवार लोगों की मौत भी हो जाती है। इन वाहनों की जांच करना पुलिस प्रशासन की है। लेकिन पुलिस उसी समय चालान करती है जब उन्हें टारगेट पूरा करना होता है। वर्ह वाहनों को लेकर किसी प्रकार का जागरूकता अभियान भी नहीं चलाया जाता। अगर खामियां दूर हो जाएगी तो ऐसे वाहनों से होने वाले हादसों को रोका जा सकता है। बिना नंबर प्लेट वाहन भी शहरों में चल रहे पिछले तीन चार सालों से मोटरसाइकिल के पीछे रेहड़ी बना ली है जो हादसे का कारण बन रही है। पुलिस के सामने से ये वाहन गुजरते है लेकिन चालान आज तक नहीं होता। नियम के अनुसार ऐसे वाहन सड़कों पर नहीं दौड़ सकते लेकिन फतेहाबाद जिले में बात करे तो 500 से अधिक ऐसे वाहन मिल जाएंगे जो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके अलावा छोटे वाहन जैसे बाइक, स्कूटी व ऑटो की फिटनेस पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। इनकी जांच करने का तरीका भी गलत है। सबसे अधिक ये प्रदूषण फैलाते है। लेकिन प्रदूषण के चालान से बचने के लिए रसीद होती है। प्रदूषण केंद्र जो बने हुए है वो केवल रुपये लेकर पर्ची काटकर दे देते हैं। प्रदूषण जांचने के लिए किसी के पास कोई यंत्र तक नहीं होता है। अगर यंत्र नहीं होगा तो उसकी फिटनेस कैसे जांची जा सकती। आरटीओ विभाग के कर्मचारी नहीं आते नजर वाहनों की फिटनेस जांचने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी आरटीओ विभाग की होती है। लेकिन जिले में इस विभाग के कर्मचारी कहीं नजर तक नहीं आते। सबसे बड़ी बात ये है कि इस विभाग ने वाहनों कीे खरीदा बेचा जाता है। लेकिन वाहन की जांच करने के लिए कोई नियम तक नहीं है। पिछले दिनों आरटीओ विभाग के सचिव ने ट्रांसपोर्ट संचालकों की बैठक लेकर अंदेशा जताया था कि वो दलालों से बचे। उनकी तरफ से आदेश भी दिए है कि जब वाहन मालिक आएगा तभी वो कागजात को पूरा करेंगे। लेकिन अब देखना होगा कि इन नियमों का कहां तक पालन होता है। रिफ्लेक्टर और फॉग लाइट की नहीं व्यवस्था सड़क दुर्घटना से बचना है तो नियमों के साथ वाहनों की जांच भी जरूरी है। आज भी 40 फीसद वाहन ऐसे सड़कों पर मिल जाएंगे जिनके यहां फॉग लाइट तक की व्यवस्था नहीं होती। इसके अलावा रिफ्लेक्टर आदि तक नहीं मिलते है। वहीं फतेहाबाद जिला पंजाब के क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण सबसे अधिक ट्रैक्टर ट्राली यहां से गुजरते हैं। ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर आदि नहीं होने के कारण रात के समय कुछ दिखाई नहीं देते हैं। वह
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