खोजी/सुभाष कोहली कालका। हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली मनाई जाती है। इसी दिन दीपावली उत्सव के साथ महालक्ष्मी पूजन का अनुष्ठान होता है, घर दीयों से सजाए जाते हैं, घरों में पकवान बनते है
ं, रंगोली बनाई जाती है, पटाखे छोड़े जाते हैं। लेकिन अमावस्या तिथि के निर्धारण को लेकर अलग-अलग मान्यताओं के कारण दिवाली 2024 की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम है। शास्त्र-मत व हिन्दी कैलेंडर अनुसार एस्ट्रोलॉजर पंडित एम. एस. थपलियाल (आदित्य) ने बताया की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन ही दिवाली मनाई जाती है और इसी दिन महालक्ष्मी पूजन किया जाता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार कार्तिक अमावस्या 31 अक्टूबर, गुरुवार 2024 को दोपहर लगभग 3.52 बजे शुरू हो रही है और अमावस्या तिथि 1 नवंबर, शुक्रवार 2024 को शाम 06.16 बजे संपन्न हो रही है। हमेशा दिवाली अमावस्या में ही मनाई जाती है। यह अमावस्या की रात में मनाने का त्योहार है, दीपोत्सव को रात में ही मनाया जाता है। 31 अक्टूबर 2024 यानी बृहस्पतिवार को अमावस्या तिथि दिन में लगभग 3 बजकर 52 मिनट से लग रही है। इससे पहले चतुर्दशी तिथि है, इस कारण से दीपावली 31 तारीख को ही इस वर्ष मनाई जाएगी। दीपावली के त्योहार पर महारात्रि में अमावस्या तिथि होनी ही चाहिए, इसमें उदया तिथि की मान्यता नहीं होती। 1 नवबंर को अमावस्या तिथि प्रदोष और निशिता काल को स्पर्श नहीं कर रही है, जबकि 31 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल से लेकर निशिता काल तक व्याप्त रहेगी, साथ ही 1 नवंबर को आयुष्मान योग और स्वाति नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ले्किन, तिथियों और पंचांग के अनुसार, इस बार 31 अक्टूबर को ही दिवाली मनाना ज्यादा शुभ रहेगा, जबकि अमावस्या से जुड़े दान पुण्य के कार्य और पितृ कर्म आदि 1 नवंबर को सुबह के वक्त करना उचित होगा। (31 अक्टूबर को शाम में आप 6:27 मिनट से लेकर रात में 8:32 मिनट तक पूजा करने का शुभ मुहूर्त है।)
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