करवा चौथ पर्व को लेकर महिलाओं ने साज श्रृंगार कर किया पूजा पाठ, चढ़ाया सूर्य देव को अर्क पुष्पेंद्र शर्मा फिरोजपुर झिरका। करवा चौथ के पावन पर्व को लेकर महिलाओं ने पूरे साज श्रृंगार के साथ वि
ि विधान के साथ व्रत रखा और इस अवसर पर महिलाओं ने एक समूह बनाकर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा चौकी पर रखकर करवा माता की कहानी सुनी और पूरे दिन बहू की प्यासी रहकर करवा चौथ का पर्व मनाया। इस अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार से परिपूर्ण नजर आई। इसकी उपरांत पूजा अर्चना भी की गई और शाम के समय सूरज को पानी से अर्क देकर आपस में महिलाएं करवे बदले गए। महिलाओं ने अपने से बड़ी उम्र की महिलाओं और अपने घरों के आसपास रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद भी प्राप्त किया। इस पावन पर्व के उपलक्ष्य पर भी महिलाओं ने अपने घरों में स्वादिष्ट पकवान बनाएं। इस अवसर पर महिलाएं काफी उत्साहित नजर आई और रात्रि करीब 12 बजे चंद्र भगवान के दर्शन करने के उपरांत उन्हें पानी से अरख देकर अपने पति, अपने से बड़े बुजुर्गों एवं बच्चों को भोजन खिलाने के उपरांत व्रत खोल गया। इस अवसर पर सुहागिन मधुबाला, रेनू ,पिस्ता देवी, निशा, प्रेरणा जैन, पूनम, भारती देवी, मिथिलेश आदि ने बताया कि पौराणिक काल से यह मान्यता चली आ रही है कि पतिव्रता सती सावित्री के पति सत्यवान को लेने जब यमराज धरती पर आए तो सत्यवान की पत्नी ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस मांगने की प्रार्थना की। उसने यमराज से कहा कि वह उसके सुहाग को वापस लौटा दें। मगर यमराज ने उसकी बात नहीं मानी। इस पर सावित्री अन्न जल त्यागकर अपने पति के मृत शरीर के पास बैठकर विलाप करने लगी। काफी समय तक सावित्री के हठ को देखकर यमराज को उस पर दया आ गई। यमराज ने उससे वर मांगने को कहा।इस पर सावित्री ने कई बच्चों की मां बनने का वर मांग लिया। जब से ही करवा चौथ का व्रत पारंपरिक रूप से अब तक मनाया जा रहा है। देर रात्रि चंद्र देवता के दर्शन कर चढ़ाया अर्क पतिदेव की चरण छूकर लिए आशीर्वाद: करवा चौथ व्रत को लेकर महिलाओं द्वारा जहां पूरे दिन सजने सवरने के साथ पूजा पाठ का आयोजन किया गया। वहीं देर रात्रि चंद्र देवता के दर्शन करने के उपरांत ही चंद्र देवता को अर्क देकर अपने व्रत का समापन पतिदेव के पैर छूकर आशीर्वाद लेकर पूर्ण किया
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